भारत की राजनीतिक कंसल्टिंग इंडस्ट्री में एक भूकंप आया है। एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने I-PAC के डायरेक्टर और सह-संस्थापक विनेश चंदेल को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोप गंभीर है — पश्चिम बंगाल के कोयला खनन घोटाले से जुड़ी करीब 20 करोड़ रुपये की हवाला रकम I-PAC तक पहुंचने का। यह गिरफ्तारी उस ताजा छापेमारी अभियान के बाद आई है जिसमें ED ने हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में I-PAC के कार्यालयों पर एक साथ छापे मारे थे। विनेश चंदेल को PMLA यानी धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है और उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा।
इस मामले की जड़ें पश्चिम बर्धमान जिले के ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों तक जाती हैं, जहां से कथित तौर पर अवैध खनन और कोयले की तस्करी होती रही। CBI ने 2020 में इस मामले में FIR दर्ज की थी। ED का दावा है कि इस अवैध खनन से जो काला धन पैदा हुआ, उसका एक हिस्सा हवाला चैनलों के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर किया गया। I-PAC — जो 2015 में स्थापित हुआ था — तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख राजनीतिक सलाहकार संगठन है और पार्टी के IT, मीडिया और चुनावी अभियानों को संभालता है। पहले भी ED ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी से पूछताछ की थी और उन पर अवैध खनन से फायदा उठाने का आरोप लगाया था।
लेकिन यह मामला सिर्फ वित्तीय अपराध का नहीं है — यह राजनीतिक युद्ध का एक अध्याय है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही आरोप लगाया है कि ED ने चुनावों से ठीक पहले I-PAC पर छापा मारकर पार्टी का डेटा चुराने की कोशिश की। बंगाल सरकार ने ED पर सबूत हटाने और जांच में राजनीतिक मकसद का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ ED का कहना है कि ममता सरकार ने ही तलाशी में बाधा डाली और सबूत नष्ट कराए। I-PAC ने खुद को पारदर्शी पेशेवर कंसल्टेंसी बताते हुए कहा है कि उन पर किसी राजनीतिक विचारधारा का प्रभाव नहीं है। लेकिन सच यह है कि इस गिरफ्तारी ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या भारत में राजनीतिक कंसल्टिंग फर्में अब जांच एजेंसियों और सत्ता की राजनीति के बीच पिस रही हैं, या फिर कहीं गहरे स्तर पर सच में काले धन का खेल चल रहा है? यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।