डोनाल्ड ट्रम्प ने एक और बम गिराया। उन्होंने ऐलान किया कि अमेरिका होर्मुज़ जलडमरूमध्य को "साफ़" करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। ये वही जलमार्ग है जिससे दुनिया का 20% तेल गुज़रता है, और जो हफ़्तों से ईरान-अमेरिका टकराव का केंद्र बना हुआ है। ट्रम्प ने ये भी कहा कि दुनिया भर से ख़ाली टैंकर अमेरिका की ओर आ रहे हैं तेल ख़रीदने के लिए — लेकिन इसकी कोई तफ़सील नहीं दी। क्या ये सैन्य कार्रवाई है? नौसैनिक अभियान है? या सिर्फ़ कूटनीतिक दबाव? कोई नहीं जानता। लेकिन बाज़ार इंतज़ार नहीं करते — तेल की क़ीमतों में तुरंत उछाल आया।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य को "साफ़ करना" एक ऐसा बयान है जो कई मायनों में ख़तरनाक है। इस जलमार्ग से रोज़ाना लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुज़रता है। सऊदी अरब, इराक़, कुवैत और यूएई का तेल निर्यात इसी से होता है। अगर अमेरिका यहाँ कोई सैन्य कार्रवाई करता है, तो तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह बिखर सकती है। ईरान ने पहले ही चेतावनी दे रखी है कि होर्मुज़ पर कोई भी उकसावा सीज़फ़ायर तोड़ने का बहाना बन सकता है। ये इस्लामाबाद वार्ता के ठीक बीच में एक बेहद संवेदनशील क़दम है।
ट्रम्प की रणनीति साफ़ है — बातचीत की मेज़ पर बैठो, लेकिन हथौड़ा हाथ में रखो। होर्मुज़ को "क्लियर" करने की धमकी ईरान पर दबाव बनाने का ज़रिया है। लेकिन ये दोधारी तलवार है। अगर ईरान ने इसे उकसावा माना, तो सीज़फ़ायर टूट सकता है। अगर तेल बाज़ार में दहशत फैली, तो ग़ैस की क़ीमतें और बढ़ेंगी — जो पहले से ही 4 डॉलर प्रति गैलन पार कर चुकी हैं। ट्रम्प शतरंज खेल रहे हैं, लेकिन गलत चाल से सारी बिसात उलट सकती है।