इंसान फिर से चाँद तक गया — और वापस भी आ गया। NASA का आर्टेमिस II मिशन 10 दिनों की महाकाव्य यात्रा के बाद सफलतापूर्वक पूरा हो गया। ओरायन कैप्सूल सैन डिएगो के तट पर प्रशांत महासागर में उतरा — मिशन कंट्रोल ने इसे "परफ़ेक्ट बुल्सआई स्प्लैशडाउन" कहा। कमांडर रीड वाइज़मैन ने रेडियो पर पुष्टि की कि चारों क्रू मेंबर्स ठीक हैं। 1972 में अपोलो 17 के बाद पहली बार इंसानों ने चंद्रमा को इतने क़रीब से देखा — और वापसी का ये पल अंतरिक्ष इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।
आर्टेमिस II 1 अप्रैल को SLS रॉकेट पर लॉन्च हुआ था। क्रू में चार लोग थे — NASA के रीड वाइज़मैन (कमांडर), विक्टर ग्लोवर (पायलट), क्रिस्टीना कोच (मिशन स्पेशलिस्ट), और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैन्सन (मिशन स्पेशलिस्ट)। 6 अप्रैल को — मिशन के छठे दिन — इन्होंने अपोलो 13 का रिकॉर्ड तोड़ दिया और पृथ्वी से सबसे दूर जाने वाले इंसान बन गए। चंद्रमा की फ़्लाईबाई सात घंटे चली — जिसमें क्रू ने चंद्रमा के दूसरी तरफ़ की तस्वीरें लीं, सोलर कोरोना का अध्ययन किया, और उल्कापिंडों की चमक देखी।
स्प्लैशडाउन के बाद रिकवरी टीम ने हेलीकॉप्टर से क्रू को USS जॉन पी. मर्था पर पहुँचाया, जहाँ मेडिकल चेकअप हुआ। इसके बाद वो ह्यूस्टन में NASA के जॉनसन स्पेस सेंटर जाएँगे। लेकिन आर्टेमिस II सिर्फ़ एक मिशन नहीं — ये अगले चरण की तैयारी है। आर्टेमिस III में NASA इंसानों को चंद्रमा की सतह पर उतारेगा — जो 50 साल से ज़्यादा समय बाद पहली बार होगा। और इस बार सिर्फ़ "झंडा गाड़ना" नहीं — चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाने की नींव रखी जाएगी। अंतरिक्ष की दौड़ अब सिर्फ़ अमेरिका-रूस की नहीं रही — चीन, भारत, यूरोप सब मैदान में हैं। आर्टेमिस II ने साबित किया कि NASA अभी भी इस दौड़ में सबसे आगे है — और चाँद पर इंसान की वापसी अब सपना नहीं, हक़ीक़त बनने वाली है।