भारतीय सशस्त्र बलों में आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव अब दरवाज़े पर खड़ा है। चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने बेंगलुरु में रण संवाद 2026 — भारत का ट्राई-सर्विस सेमिनार — में साफ़ ऐलान किया कि थिएटराइज़ेशन का प्रपोज़ल एक हफ़्ते के अंदर रक्षा मंत्रालय को सौंप दिया जाएगा। ये वो रिफ़ॉर्म है जिसका इंतज़ार दशकों से हो रहा था — थलसेना, वायुसेना और नौसेना को अलग-अलग चलाने की बजाय इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड्स में बदलना।
आज भारत की सैन्य कमान की संरचना वही है जो अंग्रेज़ छोड़कर गए थे। तीनों सेनाएँ अपनी-अपनी दुनिया में ऑपरेट करती हैं — अपने बजट, अपनी प्लानिंग, अपनी कमांड चेन। लेकिन आधुनिक युद्ध मल्टी-डोमेन है — ज़मीन, आसमान, समुद्र, साइबर, स्पेस — सब एक साथ। अमेरिका, चीन, रूस — सब थिएटर कमांड मॉडल पर चल रहे हैं। भारत अभी तक पुरानी सिस्टम में फँसा था। चौहान ने रण संवाद में स्वीकार भी किया कि ये बदलाव आसान नहीं है — तीनों सेनाओं के बीच ट्रफ़ वॉर है, बजट की लड़ाई है, ईगो की दीवारें हैं। लेकिन अब और देर नहीं हो सकती।
जनरल चौहान का कार्यकाल इसी रिफ़ॉर्म को अंजाम देने के लिए मई 2026 तक बढ़ाया गया है। रण संवाद 2026 — जो 9-10 अप्रैल को वायुसेना ट्रेनिंग कमांड, बेंगलुरु में हुआ — का मक़सद ही यही था कि सर्विंग ऑफ़िसर्स को खुलकर बोलने का मंच मिले। चौहान ने इसे "कोहेरेंस इज़ द न्यू कैपेबिलिटी" कहा — यानी अब ताक़त सिर्फ़ हथियारों में नहीं, तालमेल में है। अगर भारत को दो मोर्चों पर युद्ध की तैयारी रखनी है — चीन उत्तर में और पाकिस्तान पश्चिम में — तो थिएटराइज़ेशन कोई विकल्प नहीं, मजबूरी है। सवाल अब "क्या करना है" का नहीं रहा — सवाल "कब तक लागू होगा" का है। और जवाब है — एक हफ़्ते में फ़ाइल रक्षा मंत्रालय की मेज़ पर होगी।