ट्रम्प ने ईरान से बातचीत के लिए अपने सबसे भरोसेमंद लोगों को मैदान में उतारा है। उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस दल का नेतृत्व कर रहे हैं — वो शख़्स जिसे ट्रम्प अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी मानते हैं। उनके साथ हैं विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़, जो पहले से मध्य पूर्व कूटनीति में ट्रम्प की आँख और कान रहे हैं। और फिर है जेरेड कुशनर — ट्रम्प के दामाद, जिन्होंने पहले कार्यकाल में अब्राहम समझौतों की नींव रखी थी। ये तीनों मिलकर ट्रम्प के "इनर सर्कल" का सबसे ताक़तवर संयोजन हैं। वैंस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एंड्रयू बेकर और एशियाई मामलों के विशेष सलाहकार माइकल वैंस भी वार्ता में शामिल हैं।
सामने 71 सदस्यीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल है — वार्ताकार, तकनीकी विशेषज्ञ, मीडिया प्रतिनिधि और सुरक्षा अधिकारी। ईरान ने संख्या बल के मामले में अमेरिका को बौना कर दिया है, लेकिन संख्या हमेशा ताक़त का पैमाना नहीं होती। अमेरिका ने भी "सम्बंधित विषयों में विशेषज्ञों का पूरा सेट" इस्लामाबाद लाया है, और वॉशिंगटन से अतिरिक्त टीम दूर से सहायता कर रही है। ये बताता है कि अमेरिका इन वार्ताओं को गंभीरता से ले रहा है — ये सिर्फ़ फ़ोटो खिंचवाने का मौक़ा नहीं, बल्कि असली डील की कोशिश है।
लेकिन सबसे दिलचस्प बात कुशनर की मौजूदगी है। कुशनर वो शख़्स हैं जिन्होंने इज़रायल और अरब देशों के बीच अब्राहम समझौते करवाए — जो उस वक़्त असंभव माने जाते थे। क्या वो अब ईरान और अमेरिका के बीच भी ऐसा ही चमत्कार कर सकते हैं? ट्रम्प ने ये संदेश दे दिया है कि ये वार्ता उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है — वरना उपराष्ट्रपति और दामाद दोनों को एक साथ नहीं भेजते। अगर ये टीम कामयाब होती है, तो ट्रम्प को वो विरासत मिलेगी जो ओबामा और बाइडन दोनों को नहीं मिली — ईरान के साथ शांति। और अगर नाकाम हुई? तो मध्य पूर्व का अगला अध्याय और भी ख़ूनी हो सकता है।