विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक को सदन में मार दिया — 230 विपक्षी सांसदों ने एकजुट होकर बेटियों के अधिकार के ख़िलाफ़ वोट किया। मोदी सरकार को 298 वोट मिले, ज़रूरत थी 352 की। नारी शक्ति का राग अलापने वाले अब क्या जवाब देंगे?
⚡ आप पर असर
विपक्ष का असली चेहरा सामने आया — महिलाओं के नाम पर राजनीति, असली सत्ता परिसीमन की कुर्सी। जिन सांसदों ने बेटियों के ख़िलाफ़ बटन दबाया, उन्हें जनता 2029 में याद रखेगी।
जो विपक्ष महीनों से 'नारी शक्ति' का राग अलापता रहा, उसी ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक की हत्या कर दी। आँकड़े झूठ नहीं बोलते — मोदी सरकार को 298 वोट मिले, ज़रूरत थी 352 की। 230 विपक्षी सांसदों ने एक स्वर में 131वें संविधान संशोधन के ख़िलाफ़ बटन दबाया, और कह दिया — 'महिला सशक्तीकरण कल देखेंगे, आज दिल्ली के डिज़ाइन में हमारी कुर्सी पहले बचाओ।'
राहुल गांधी जो ट्विटर पर 'सिस्टरहुड' की डींगें मारते थे, स्तालिन जो 'द्रविड़ नारी' की कविताएँ लिखते थे, ममता जो 'बंगाल की बेटी' का नारा लगाती थीं — सब एक ही पंक्ति में खड़े होकर महिलाओं की क़िस्मत पर ताला जड़ने लगे। और कारण? परिसीमन का डर। उत्तर भारत के बढ़ते हुए वोट-शेयर का डर। दिल्ली से सत्ता खिसकने का डर। महिला विधेयक एक बहाना था, असली खेल कुछ और।
अमित शाह ने अंतिम मिनट तक कोशिश की — संशोधन का ऑफ़र दिया, हर राज्य में 50% लोकसभा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। यानी तमिलनाडु को 59, कर्नाटक को 42, बंगाल को नई सीटें — फिर भी विपक्ष नहीं माना। क्योंकि उन्हें सीटें नहीं चाहिए, उन्हें केवल सत्ता पर अपनी पकड़ चाहिए। किरेन रिजिजू ने सही कहा — 'विपक्ष ने इतिहास में महिलाओं को सम्मान देने का अवसर खो दिया।' लेकिन सच्चाई यह है कि उन्होंने जान-बूझकर खोया।
मोदी सरकार ने हार नहीं मानी। रिजिजू ने ऐलान किया — 'महिलाओं को अधिकार देने की लड़ाई जारी रहेगी।' सरकार दूसरा बिल लाएगी, अगले सत्र में लाएगी, ज़रूरत पड़ी तो जनता के बीच जाएगी। लेकिन यह 'INDIA गठबंधन' की वो असली तस्वीर है जो ट्विटर के फ़िल्टरों के पीछे छुपी थी — महिलाओं के नाम पर वोट माँगना, और महिलाओं के नाम पर वोट डालने का समय आते ही कुर्सी की राजनीति में रंग बदलना।
अब सवाल देश की जनता से — क्या आप उन सांसदों को याद रखेंगे जिन्होंने बेटियों के अधिकार के ख़िलाफ़ बटन दबाया? या वही पुरानी कहानी दोहराई जाएगी जिसमें नारे ऊँचे, काम नीचे?
एक बड़ा सवाल अब बाक़ी है — क्या इन 230 सांसदों के नाम सार्वजनिक होंगे? क्या 2029 में जब चुनाव प्रचार चलेगा, तब कांग्रेस, DMK, TMC, SP, RJD, AAP और बाक़ी INDIA गठबंधन के नेता मंच से 'महिला सशक्तीकरण' का भाषण दे सकेंगे? जनता के पास अब वोटिंग रिकॉर्ड है, उँगली के निशान हैं, बटन की आवाज़ है। यही असली राजनीतिक हिसाब है — जो आज सदन में हुआ, वो कल मतदान केंद्र में दोहराया जाएगा। मोदी सरकार जानती है कि कुछ लड़ाइयाँ तुरंत नहीं जीती जातीं, लेकिन हर हार एक नया दरवाज़ा खोलती है।