एक ऐसी महिला जो व्यवस्था से नहीं डरती, बल्कि व्यवस्था को बदलती है — रेखा शर्मा भारत की उन दुर्लभ नेताओं में से हैं जिन्होंने पद की गरिमा को अपनी कर्मठता से ऊंचा उठाया।
जब 2018 में रेखा शर्मा ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्षता संभाली, तो बहुतों ने इसे एक और नियुक्ति माना। लेकिन अगले छह वर्षों में उन्होंने साबित किया कि वे किसी साधारण पदाधिकारी नहीं, बल्कि एक योद्धा हैं — निडर, निर्भीक और अथक।
9 साल जो इतिहास बन गए
रेखा शर्मा का NCW से नाता 2015 में सदस्य के रूप में शुरू हुआ और 2024 तक अध्यक्ष के रूप में जारी रहा — पूरे 9 साल। इस दौरान उन्होंने 50 से अधिक महत्वपूर्ण जांचें की, जिनमें NRI पतियों द्वारा परित्यक्त भारतीय महिलाओं के मामले प्रमुख थे। उन्होंने NRI विवाह प्रकोष्ठ की स्थापना की जिसने विदेशों में फंसी भारतीय महिलाओं को बचाया और उनके बच्चों की कस्टडी दिलाई।
पुलिस को संवेदनशील बनाने का मिशन
रेखा शर्मा की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि शायद पुलिस व्यवस्था के साथ उनका समन्वय है। उन्होंने Bureau of Police Research and Development के साथ मिलकर एक अभिनव सहयोग की शुरुआत की जिसका लक्ष्य था — पुलिसकर्मियों को लैंगिक हिंसा की पीड़िताओं के प्रति संवेदनशील बनाना। COVID-19 के दौरान उन्होंने 30 पुलिस प्रमुखों के साथ बैठक कर घरेलू हिंसा के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की। उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक, जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक — हर राज्य में उन्होंने पुलिस अधिकारियों से सीधे संवाद किया।
जम्मू-कश्मीर में उन्होंने पहली बार जनसुनवाई आयोजित की और क्षेत्र की महिलाओं की समस्याओं के लिए एक अलग प्रकोष्ठ बनाया — एक ऐसा कदम जो पहले कभी नहीं उठाया गया था।
शिक्षा और आधुनिक सोच का संगम
पुणे विश्वविद्यालय से भौतिकी में बीएससी और इतिहास में एमए, DAV कॉलेज देहरादून से राजनीति शास्त्र, इतिहास और अंग्रेजी साहित्य — रेखा शर्मा की शैक्षिक पृष्ठभूमि उतनी ही विविध है जितना उनका कार्यक्षेत्र। कंप्यूटर सिस्टम मैनेजमेंट में उच्च डिप्लोमा ने उन्हें तकनीक की दुनिया से जोड़ा। उनकी बेटियां टेक्नोलॉजी क्षेत्र में सक्रिय हैं, जो उन्हें नई पीढ़ी की सोच और डिजिटल दुनिया की बारीकियों को समझने में प्रेरित करती हैं। यही कारण है कि NCW में उन्होंने WhatsApp हेल्पलाइन जैसी तकनीकी पहल शुरू की जिससे 900 से अधिक गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा आपातकाल में मदद मिली।
सेना की पत्नी, राष्ट्र की सेविका
एक सेना अधिकारी की पत्नी के रूप में रेखा शर्मा ने अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का अंग बनाया। यह सैन्य संस्कार उनके काम में स्पष्ट दिखता है — त्वरित निर्णय, कठोर कार्रवाई और कोई समझौता नहीं। 5,000 महिला उद्यमियों के लिए बिजनेस कोर्स शुरू करना हो या हरियाणा में जिला उपभोक्ता फोरम में सेवा देना — उन्होंने हर भूमिका को पूरी ईमानदारी से निभाया।
राज्यसभा: नई पारी, बड़ा मंच
दिसंबर 2024 में हरियाणा से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित होना उनकी क्षमताओं की स्वीकृति है। संसद में उन्होंने CSR खर्च में महिला सशक्तिकरण की वास्तविकता पर सवाल उठाए — कहा कि "सिलाई और ब्यूटी कोर्स" से आगे बढ़कर महिलाओं को सप्लाई चेन, औपचारिक बाजारों और निर्णय लेने की जगहों में शामिल करना होगा। Central Armed Police Forces Bill 2026 पर भी उन्होंने सशक्त समर्थन दिया।
हाल ही में #ShaktiKiSamriddhi — महिला वित्तीय सशक्तिकरण शिखर सम्मेलन 2026 में मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने महिला नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
वैश्विक दृष्टिकोण और अमेरिका यात्रा
रेखा शर्मा की हालिया अमेरिका यात्रा ने उन्हें वैश्विक महिला अधिकार आंदोलनों और नीतियों की गहरी समझ दी है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय महिला सशक्तिकरण की कहानी को प्रस्तुत करना और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को भारत में लागू करने की दृष्टि — यह उनकी सोच को स्थानीय से वैश्विक बनाता है।
क्यों चाहिए बड़ी भूमिका?
भारत को ऐसे नेताओं की जरूरत है जो न सिर्फ बोलें बल्कि करके दिखाएं। रेखा शर्मा ने 9 साल में साबित किया है कि वे:
- राज्यों और पुलिस व्यवस्था के साथ प्रभावी समन्वय कर सकती हैं
- संकट के समय त्वरित हस्तक्षेप कर सकती हैं
- तकनीक और परंपरा दोनों को समझती हैं
- वैश्विक दृष्टिकोण रखती हैं लेकिन जमीनी हकीकत से जुड़ी हैं
- मोदी प्रशासन की दृष्टि को धरातल पर उतार सकती हैं
रेखा शर्मा सिर्फ एक नेता नहीं, वे एक आंदोलन हैं — महिलाओं के अधिकारों का, न्याय का, और निडर नेतृत्व का। भारत का नया चेहरा, जो दुनिया को दिखाता है कि इस देश की महिलाएं न सिर्फ बराबरी की हकदार हैं, बल्कि नेतृत्व की भी।