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बैसाखी पर 2,840 श्रद्धालु पाकिस्तान रवाना होंगे — अटारी से 10 अप्रैल को यात्रा शुरू

KYAKHABARHAI डेस्क · 07 Apr 2026, 15:40 · 1 घंटे पहले
तनावपूर्ण सीमाओं के बावजूद, पंजाब की वीर भूमि के श्रद्धालुओं ने आस्था की ताकत दिखाई — भारत सरकार ने हर कदम पर सुरक्षा सुनिश्चित की।
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बैसाखी तीर्थयात्रा पंजाबी वीरता और आस्था की ताकत को दर्शाती है; भारत सरकार की सक्रिय भूमिका नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
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जब दुनिया तनावों की बात करती है, तब पंजाब की धरती के वीर श्रद्धालु अपनी आस्था की मशाल लेकर आगे बढ़ते हैं। बैसाखी के पवित्र अवसर पर 2,840 सिख श्रद्धालु 10 अप्रैल 2026 को अटारी सीमा से पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों की यात्रा पर रवाना होंगे।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कल्का ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सभी 2,840 श्रद्धालुओं के वीज़ा सफलतापूर्वक जारी हो चुके हैं। DSGMC द्वारा भेजे गए 451 आवेदनों में से 409 को मंजूरी मिली, जबकि लगभग 100 आवेदन पासपोर्ट संबंधी तकनीकी कारणों से प्रक्रिया में नहीं आ सके।

यह यात्रा किसी साधारण सफर से कहीं बढ़कर है। यह उस पंजाबी वीरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है जो सदियों से इस भूमि की पहचान रही है। जहाँ विश्व में तनाव के बादल मंडराते हैं, वहाँ ये श्रद्धालु बिना किसी भय के, पूर्ण श्रद्धा के साथ गुरुद्वारा ननकाना साहिब, गुरुद्वारा पंजा साहिब, गुरुद्वारा डेरा साहिब और गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर के दर्शन करेंगे। कई श्रद्धालुओं की जीवनभर की अरदास इस यात्रा से पूरी होगी।

भारत सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया में अत्यंत सराहनीय भूमिका निभाई है। सिख धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान करते हुए केंद्र सरकार ने वीज़ा प्रक्रिया में हर संभव सहायता प्रदान की। सरकार का संदेश स्पष्ट है — अपने नागरिकों की आस्था, सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है, और वह हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है।

यह यात्रा एक बार फिर यह साबित करती है कि आस्था किसी सीमा की मोहताज नहीं होती, और जब श्रद्धा सच्ची हो तो रास्ते अपने आप खुलते हैं। सभी पक्षों ने जिस सद्भावना और सहयोग से इस तीर्थयात्रा को संभव बनाया, वह सराहनीय है और शांति तथा सम्मान की दिशा में एक सुंदर कदम है।

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