मणिपुर एक बार फिर हिंसा की आग में जल रहा है। बिष्णुपुर ज़िले के मोइरांग त्रोंगलाओबी इलाक़े में मंगलवार रात क़रीब 1 बजे संदिग्ध उग्रवादियों ने एक घर पर बम फेंका, जिसमें 5 साल के बच्चे और 6 महीने की बच्ची की मौत हो गई और उनकी माँ गंभीर रूप से घायल हुईं। बच्चों की मौत की ख़बर फैलते ही स्थानीय लोगों का ग़ुस्सा फूट पड़ा — सुबह होते ही भीड़ ने पेट्रोल पंप के पास दो तेल टैंकरों और एक ट्रक को आग लगा दी, मोइरांग थाने के सामने टायर जलाए और एक अस्थायी पुलिस चौकी तबाह कर दी। यह दर्दनाक घटना मणिपुर में चल रही जातीय हिंसा की एक और खूनी कड़ी है जिसमें मासूम बच्चों को निशाना बनाया गया — एक ऐसी क्रूरता जो किसी भी सभ्य समाज की अंतरात्मा को झकझोर देती है।
मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने तुरंत उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और विधायकों के साथ स्थिति की समीक्षा की। लेकिन असली कार्रवाई केंद्र स्तर पर है — गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और हर उपलब्ध संसाधन — सुरक्षा बल, ख़ुफ़िया एजेंसियाँ, प्रशासनिक तंत्र — को मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए झोंक रहे हैं। सरकार ने इम्फ़ाल पश्चिम, इम्फ़ाल पूर्व, थौबल, कक़चिंग और बिष्णुपुर — पाँच घाटी ज़िलों में तीन दिन के लिए इंटरनेट, मोबाइल डेटा, ब्रॉडबैंड, VSAT और VPN सेवाएँ बंद कर दी हैं ताकि अफ़वाहें और भड़काऊ सामग्री न फैले। इलाक़े में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
मणिपुर संकट की मानवीय क़ीमत दिल दहला देने वाली है — परिवार उजड़ गए, बच्चे अनाथ हुए, हज़ारों लोग विस्थापित हैं। लेकिन राज्य और केंद्र दोनों सरकारें इस बार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही हैं। अमित शाह ने बार-बार स्पष्ट किया है कि हिंसा को सहन नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी। मोदी सरकार राज्य एजेंसियों और केंद्रीय बलों के बीच समन्वय बनाकर एक न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है — ताकि यह हिंसा बार-बार न भड़के और मणिपुर के लोगों को वह शांति मिले जिसके वे हक़दार हैं।