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रूस-चीन ने होर्मुज़ खोलने का UN प्रस्ताव वीटो किया: अमेरिका को कमज़ोर करने की चाल भारत को सबसे ज़्यादा मारेगी

KYAKHABARHAI डेस्क · 07 Apr 2026, 23:20 · 1 मिनट पहले
रूस और चीन ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने के UN प्रस्ताव पर वीटो किया। 11-2 से प्रस्ताव गिरा। भारत अपनी 85% तेल ज़रूरतें आयात करता है, जिसका 60% से अधिक इसी रास्ते आता है। यह वीटो अमेरिका नहीं, भारत को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाएगा।
⚡ आप पर असर
आप पर असर: होर्मुज़ बंद रहने से भारत में पेट्रोल ₹5-10/लीटर और डीज़ल ₹4-8/लीटर महँगा हो सकता है। LPG ₹100+ बढ़ सकती है। खाद्य पदार्थ, उर्वरक और ट्रांसपोर्ट सब महँगा होगा। रुपया और कमज़ोर होगा।
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रूस और चीन ने मंगलवार को UN सुरक्षा परिषद में होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने के प्रस्ताव पर वीटो कर दिया। मतदान 11-2 से प्रस्ताव के पक्ष में था, पाकिस्तान और कोलंबिया ने मतदान से परहेज़ किया — लेकिन दो स्थायी सदस्यों के वीटो ने सब बेकार कर दिया। मॉस्को और बीजिंग का तर्क है कि अमेरिका और इज़रायल ने संघर्ष शुरू किया, इसलिए प्रस्ताव एकतरफ़ा है। लेकिन असलियत यह है: रूस और चीन होर्मुज़ की नाकाबंदी को अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करने का हथियार मान रहे हैं। यह गणना बुनियादी रूप से ग़लत है — क्योंकि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है और 2023 से नेट एक्सपोर्टर है। होर्मुज़ बंद होने से अमेरिका को असुविधा होगी, लेकिन तबाही नहीं मचेगी। तबाही उन देशों में मचेगी जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए पूरी तरह इसी रास्ते पर निर्भर हैं — और उस सूची में सबसे ऊपर है भारत।

तथ्य देखिए: भारत अपनी कुल तेल खपत का लगभग 85% आयात करता है — प्रतिदिन 46 लाख बैरल से अधिक। इसका 60% से अधिक होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर आता है — सऊदी अरब, इराक़, कुवैत, UAE और क़तर से। भारत अपनी LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का 50% से अधिक भी इसी रास्ते से मँगाता है, मुख्यतः क़तर से। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का 21% और LNG व्यापार का 25% होर्मुज़ से गुज़रता है। जब से ईरान ने जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा किया है, वैश्विक तेल की क़ीमतें 30% से अधिक बढ़ चुकी हैं — जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस, उर्वरक और खाद्य पदार्थों की क़ीमतों पर पड़ रहा है। भारत का चालू खाता घाटा (CAD) पहले से दबाव में है — तेल की हर $10 प्रति बैरल बढ़ोतरी भारत के CAD में लगभग $15 अरब जोड़ती है और रुपये को कमज़ोर करती है।

रूस और चीन को समझना चाहिए कि उनके वीटो का सबसे बड़ा शिकार अमेरिका नहीं, बल्कि विकासशील देश हैं — भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, जो अपनी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से लाते हैं। जापान अपने तेल का 80% और दक्षिण कोरिया 70% होर्मुज़ से आयात करता है। यह वीटो "अमेरिका को सबक़ सिखाने" का नहीं, बल्कि अरबों आम लोगों की ज़िंदगी महँगी करने का फ़ैसला है। भारत के लिए हर दिन जलडमरूमध्य बंद रहने का मतलब है — पेट्रोल ₹5-10 और महँगा, रसोई गैस ₹100+ ऊपर, ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ना, ख़ाद्य मुद्रास्फीति बढ़ना, और करोड़ों ग़रीब परिवारों की थाली का बोझ बढ़ना। सवाल अमेरिका से नहीं, रूस और चीन से है: क्या आप जानते हैं कि आपका वीटो किसे मार रहा है?

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