अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने मंगलवार को ट्रंप की डेडलाइन से घंटों पहले कहा कि अमेरिका के पास "टूलकिट में ऐसे उपकरण हैं जो अभी तक इस्तेमाल नहीं किए।" इस बयान से तुरंत परमाणु हमले की आशंका फैल गई — पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के अकाउंट ने भी कहा कि वेंस के शब्दों का मतलब "ट्रंप परमाणु हथियार इस्तेमाल कर सकते हैं।" व्हाइट हाउस ने X पर जवाब दिया — "बेवक़ूफ़ो, VP ने ऐसा कुछ नहीं कहा।" लेकिन सवाल यह है: जब राष्ट्रपति ख़ुद कह रहे हों कि "आज रात पूरी सभ्यता मर जाएगी," जब VP "टूलकिट" की धमकी दे रहे हों, जब युद्ध अपराधों की चिंता पर ट्रंप कहें "बिल्कुल नहीं" — तो परमाणु हमले की अफ़वाह "बेवक़ूफ़ी" है या उस भाषा का स्वाभाविक नतीजा जो ख़ुद इतनी ग़ैरज़िम्मेदार है कि दुनिया को डरा दे? ईरान का जवाब तीखा था — "सिकंदर ने जलाया, मंगोलों ने तबाह किया, ईरान अभी भी खड़ा है। एक मनोरोगी की धमकी वो नहीं कर सकती जो समय नहीं कर सका।"
इस बीच, इन बयानों की असली क़ीमत दुनिया चुका रही है। IEA प्रमुख फ़ातिह बिरोल ने कहा — "यह ऊर्जा संकट 1973, 1979 और 2022 को मिलाकर भी इससे बड़ा है।" ब्रेंट क्रूड $72.48 से उछलकर $111.25 पहुँच गया — 38 दिनों में 55% की उछाल। वॉल स्ट्रीट विश्लेषक $150-200 प्रति बैरल की चेतावनी दे रहे हैं। IMF, IEA और विश्व बैंक ने इतिहास में पहली बार संयुक्त "वॉर रूम" बनाया है। भारत अपनी 90% LPG ज़रूरतें होर्मुज़ से मँगाता है — हर भारतीय रसोई सीधे इस संकट से जुड़ी है। यूरोप को अप्रैल तक ईंधन की कमी की चेतावनी दी गई है। खाड़ी देशों का GDP नुक़सान $120-194 अरब (UN अनुमान) है। उर्वरक 40% महँगे, एशियाई LNG 140% ऊपर। यह सिर्फ़ संख्याएँ नहीं — यह करोड़ों परिवारों की थाली, ट्रांसपोर्ट और ज़िंदगी का सवाल है।
और इस तबाही के सबसे बड़े विजेता? रूस और चीन। रूस को $3-5 अरब का तेल बोनस मिला है — Moscow Times ने लिखा कि इस संघर्ष ने "रूस के युद्ध बजट को बचा लिया।" भारत में रूसी तेल का हिस्सा एक महीने में 20.4% से 46.8% हो गया। चीन को ईरान ने होर्मुज़ से ख़ास गुज़रने का रास्ता दिया — केवल चीनी जहाज़, युआन में भुगतान। ईरान ने चीन को 1.17 करोड़ बैरल तेल भेजा है। रूस-चीन ने UN में होर्मुज़ खोलने का प्रस्ताव वीटो किया — क्योंकि उन्हें यह बंदी चाहिए। यह संयोग नहीं, रणनीति है: अमेरिका की ग़ैरज़िम्मेदार भाषा दुनिया को डराती है, रूस-चीन उस डर को कैश करते हैं, और क़ीमत चुकाते हैं भारत जैसे देश जहाँ तेल $10 बढ़ने पर चालू खाता घाटा $15 अरब बढ़ जाता है। दुनिया एक ऐसे थिएटर में फँसी है जहाँ अभिनेता ग़ैरज़िम्मेदार हैं और दर्शक मर रहे हैं।