ईरान में भारतीय दूतावास ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए सभी भारतीय नागरिकों से कहा है कि वे "अगले 48 घंटे जहां हैं वहीं रहें।" दूतावास ने कहा कि लोग घर के अंदर रहें, बिजली और सैन्य प्रतिष्ठानों से दूर रहें, और बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों से बचें।
यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को गंभीर चेतावनी दी है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की डेडलाइन दी है।
मोदी सरकार की प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू से ही स्पष्ट किया है कि "दुनिया में कहीं भी हर भारतीय की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।" पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच मोदी सरकार ने भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय कूटनीतिक प्रयास किए हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले कई हफ्तों में कई देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की है। उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अराघची से 20 फरवरी और 5 मार्च को बात की। इसके अलावा, आर्मेनिया और अज़रबैजान की सरकारों के साथ मिलकर भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए रास्ते तैयार किए गए।
ऑपरेशन सिंधु: सुरक्षित निकासी
सरकार ने "ऑपरेशन सिंधु" के तहत ईरान से भारतीयों की व्यवस्थित निकासी शुरू की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक कुल 1,777 भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित वापस लाया गया है, जिनमें 895 छात्र और 345 मछुआरे शामिल हैं। इनमें से 1,545 लोगों को आर्मेनिया के रास्ते और 234 को अज़रबैजान के रास्ते निकाला गया।
जयशंकर ने आर्मेनियाई विदेश मंत्री अरारात मिर्ज़ोयान का भारतीय मछुआरों की निकासी में सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद दिया। मछुआरों का दल 4 अप्रैल को चेन्नई पहुंचा।
संसद में प्रधानमंत्री का संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर संबोधन करते हुए कहा कि भारत ने शुरू से ही तनाव कम करने, नागरिकों पर हमले रोकने और ऊर्जा एवं परिवहन बुनियादी ढांचे की रक्षा की वकालत की है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की नाकेबंदी "पूरी तरह अस्वीकार्य" है।
ईरान में अभी भी लगभग 9,000 भारतीय नागरिक हैं और सरकार उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास जारी रखे हुए है।