विपक्ष का नाटक: आपस में लड़ते नेता, जनता की अनदेखी
केरल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक दो दिन पहले, 9 अप्रैल को मतदान होने वाला है, और विपक्षी खेमे में भारी अंतर्कलह दिख रही है। एक तरफ केरल के कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री पिनराई विजयन हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस शासित तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी — दोनों गैर-भाजपा सरकारों के मुखिया होते हुए भी एक-दूसरे पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं।
रेवंत रेड्डी ने केरल में एक चुनावी रैली में मशहूर मोहनलाल डायलॉग का इस्तेमाल करते हुए कहा — "नी पो मोने विजया... तेरा टाइम खत्म हो गया"। इसके बाद उन्होंने छह पन्नों का पत्र लिखकर विजयन सरकार पर "पुराने आंकड़ों" का उपयोग करने और तेलंगाना की उपलब्धियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
विजयन ने जवाबी पत्र में "व्यक्तिगत अपमानजनक टिप्पणियों" पर कड़ी आपत्ति जताई, लेकिन फिर खुद भी अपशब्दों का सहारा लिया। यह तमाशा दिखाता है कि भाजपा विरोधी गठबंधन में न तो एकता है और न ही जनता के मुद्दों पर ध्यान।
केरल की जनता का असली सवाल: विकास कहां है?
जबकि कांग्रेस और वामपंथी नेता एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं, केरल की जनता गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही है:
- राज्य का कर्ज ₹4.8 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है, जो GSDP के 35% से अधिक है
- राजकोषीय घाटा 2024-25 में बढ़कर GSDP का 3.86% हो गया, जो पिछले साल के 3.02% से कहीं अधिक है
- महिला बेरोजगारी दर 11.6% है, जबकि राष्ट्रीय औसत मात्र 3.2% है
- युवा बेरोजगारी 30% के करीब पहुंच चुकी है
- GSDP वृद्धि दर गिरकर 6.19% रह गई — दक्षिण भारत में सबसे धीमी
स्वर्ण तस्करी कांड: विजयन सरकार पर गहरे सवाल
2020 का केरल स्वर्ण तस्करी कांड आज भी विजयन सरकार पर भारी साया बनकर मंडरा रहा है। मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया कि उन्हें मुख्यमंत्री का नाम मामले से बाहर रखने के लिए ₹30 करोड़ की पेशकश की गई थी। विजयन के प्रधान सचिव एम. शिवशंकर को स्वप्ना सुरेश से संबंध उजागर होने के बाद निलंबित किया गया था।
मोदी सरकार ने केरल के लिए क्या किया?
जबकि राज्य सरकारें आपस में लड़ रही हैं, केंद्र की मोदी सरकार ने केरल के विकास के लिए ठोस कदम उठाए हैं:
बुनियादी ढांचा
- ₹65,000 करोड़ की राष्ट्रीय राजमार्ग विकास योजना — 747 किमी लंबे 21 राजमार्ग परियोजनाएं
- NHAI ने 2024-25 में केरल के लिए ₹23,000 करोड़ का बजट मंजूर किया — देश में सर्वाधिक
- रेलवे आवंटन ₹372 करोड़ से बढ़ाकर ₹3,700 करोड़ — 10 गुना वृद्धि
- कोच्चि स्मार्ट सिटी के लिए ₹2,000 करोड़
- कोच्चि मेट्रो फेज-II के लिए ₹275 करोड़
- कोच्चि में ₹1,800 करोड़ की ड्राई डॉक परियोजना
जल जीवन मिशन
केंद्र ने केरल के लिए ₹7,600 करोड़ मंजूर किए, लेकिन राज्य सरकार ने अपना मिलान हिस्सा जारी नहीं किया, जिससे योजना रुकी हुई है। यह स्पष्ट करता है कि समस्या केंद्र की नहीं, बल्कि राज्य की उदासीनता की है।
बाढ़ राहत
2018 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान केंद्र ने ₹2,904 करोड़ से अधिक की सहायता प्रदान की। प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से ₹500 करोड़ के तत्काल राहत की घोषणा की।
स्वास्थ्य एवं कल्याण
भाजपा ने केरल में पहला AIIMS दो साल में शुरू करने का वादा किया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक के सभी नागरिकों को ₹5 लाख का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है — लेकिन विजयन सरकार ने इस योजना को पूरी तरह लागू करने में बाधाएं डालीं।
भाजपा का बढ़ता जनाधार
केरल में भाजपा की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। एनडीए का वोट शेयर 2014 में 14% से बढ़कर 2024 लोकसभा चुनाव में 19.7% हो गया। 2024 में भाजपा ने त्रिशूर सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। मनोरमा न्यूज-सी वोटर सर्वे के अनुसार, 2026 विधानसभा चुनाव में NDA को 1-5 सीटें मिलने का अनुमान है।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा — "केरल का चुनाव सरकार बदलने के लिए नहीं, बल्कि राज्य का भविष्य सुधारने के लिए है।" भाजपा ने महिलाओं को ₹2,500 प्रतिमाह, दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर और रोजगार सृजन का वादा किया है।
निष्कर्ष
जब कांग्रेस और कम्युनिस्ट नेता एक-दूसरे पर फिल्मी डायलॉग फेंक रहे हैं, तब मोदी सरकार ने केरल में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया है। केरल की जनता को यह तय करना है कि वे नेताओं की व्यक्तिगत लड़ाइयों में फंसना चाहती है या विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहती है। 9 अप्रैल को मतदान इसी सवाल का जवाब देगा।