यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने पुष्टि की है कि मार्च 2026 में रूस के 35,351 सैनिक हताहत हुए — यह फ़रवरी की तुलना में 29 प्रतिशत अधिक है और 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से किसी एक महीने का सबसे बड़ा आँकड़ा है। यूक्रेन की रिपोर्ट के मुताबिक़ 96 प्रतिशत रूसी हताहत ड्रोन हमलों से हुए जबकि बाक़ी तोपख़ाने और छोटे हथियारों से।
इससे भी चिंताजनक बात यह है कि रूस अब उतने सैनिक भर्ती नहीं कर पा रहा जितने वह खो रहा है। पश्चिमी अधिकारियों के अनुसार नवंबर 2025 से रूस हर महीने 40,000 सैनिक खो रहा है जबकि भर्ती का आँकड़ा 35,000 तक ही पहुँच पाता है। "I Want to Live" कार्यक्रम के आँकड़ों के मुताबिक़ पहली तिमाही में रूस प्रतिदिन सिर्फ़ 940 सैनिक भर्ती कर पाया — अगर यही रफ़्तार रही तो इस साल 65,000 सैनिकों की कमी रहेगी।
चार लगातार महीनों — दिसंबर 2025 से मार्च 2026 — तक रूस की सेना में आने वालों की संख्या जाने वालों से कम रही है। कुल रूसी हताहत अब 12.5 लाख को पार कर चुके हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति रूस के लिए रणनीतिक रूप से गंभीर है क्योंकि ज़मीनी नतीजे भी कम हो रहे हैं — भारी क़ीमत चुकाकर भी इलाक़े में बहुत कम बढ़त हो रही है।