कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 8 अप्रैल 2026 को तेलंगाना हाईकोर्ट में अग्रिम ज़मानत याचिका (CRLP 5285/2026) दायर की है। न्यायमूर्ति के. सुजना की अदालत में यह मामला 9 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। खेड़ा इस समय हैदराबाद के बंजारा हिल्स में हैं, जहाँ स्थानीय पुलिस ने उनके और उनकी पत्नी नीलिमा के आवास के बाहर बैरिकेड्स लगा दिए हैं। सवाल यह है — जिस व्यक्ति ने बड़ी बहादुरी से मुख्यमंत्री की पत्नी के निजी पासपोर्ट और संपत्ति के दस्तावेज़ मीडिया के सामने लहराए, वह खुद जाँच का सामना करने से इतना क्यों घबरा रहा है कि गुवाहाटी से दिल्ली और दिल्ली से हैदराबाद भाग गया?
इस पूरे प्रकरण की टाइमलाइन देखिए। 5 अप्रैल को खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रिनिकी भुयान सरमा पर तीन पासपोर्ट रखने — भारत, UAE और मिस्र — तथा दुबई में अघोषित लग्जरी संपत्तियाँ और अमेरिका के व्योमिंग में एक कंपनी (Asset Collective LLC) होने का आरोप लगाया। 6 अप्रैल को रिनिकी ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में BNS की 12 धाराओं में FIR दर्ज कराई — जिनमें धारा 175 (चुनाव संबंधी झूठा बयान), 337-340 (जालसाज़ी), 352 (भड़काऊ अपमान), और 356 (मानहानि) शामिल हैं। 7 अप्रैल को असम पुलिस ने दिल्ली के निज़ामुद्दीन ईस्ट स्थित खेड़ा के आवास पर छापा मारा — लगभग दो घंटे की तलाशी में आपत्तिजनक सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज़ब्त किए। खेड़ा वहाँ मिले नहीं — वे पहले ही हैदराबाद निकल चुके थे।
मिस्र के दूतावास ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि रिनिकी भुयान सरमा के नाम का कथित मिस्री पासपोर्ट "जाली" है। रिनिकी ने खुद इन दस्तावेज़ों को "फ़ेक," "AI-जनरेटेड" और "फ़ोटोशॉप्ड" बताया है — उनका कहना था "फ़ोटोशॉप में कमी रह गई।" मुख्यमंत्री सरमा ने एक "Truth Uncovered" प्रेज़ेंटेशन में दावा किया कि ये दस्तावेज़ एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप से लिए गए थे, जिसका उद्देश्य भारतीय चुनावों में हस्तक्षेप करना है। यदि यह सच है, तो खेड़ा ने जाने-अनजाने विदेशी ताकतों के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम किया है — और यह महज़ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से कहीं अधिक गंभीर मामला है।
कांग्रेस इसे "राजनीतिक उत्पीड़न" बता रही है। सांसद इमरान मसूद कहते हैं कि दस्तावेज़ी सबूत हैं जिन्हें बातों से नहीं मिटाया जा सकता। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने सरमा पर "हज़ारों झूठ" बोलने का आरोप लगाया। लेकिन तथ्य यह है कि खेड़ा दिल्ली में जाँच का सामना करने की बजाय भागकर हैदराबाद पहुँचे और वहाँ से अग्रिम ज़मानत की गुहार लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने सही कहा — "असम पुलिस पाताल से भी ढूंढकर ला सकती है।" यदि खेड़ा के आरोपों में दम है तो उन्हें भागने की क्या ज़रूरत थी? कोर्ट में आकर अपने सबूत पेश करते। लेकिन जब आपके हाथ में जाली दस्तावेज़ हों और मिस्र का दूतावास ही आपके दावे को खारिज कर दे, तो भागने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचता।
तेलंगाना हाईकोर्ट 9 अप्रैल को इस याचिका पर सुनवाई करेगी — वही दिन जब असम में मतदान है। कानूनी प्रक्रिया को अपना काम करने दीजिए। लेकिन एक बात साफ़ है — जो व्यक्ति दूसरों की गोपनीयता को तार-तार करने में नहीं हिचकता, उसे कानून की प्रक्रिया से भागने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। असम पुलिस ने जो 12 धाराओं में FIR दर्ज की है, उनमें जालसाज़ी और चुनाव में झूठे बयान जैसे गंभीर आरोप हैं। अब अदालत तय करेगी कि खेड़ा को राहत मिलती है या कानून का शिकंजा और कसता है।