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अजित डोभाल-बांग्लादेश बैठक: भारत का मास्टरस्ट्रोक और चीन की जाल से बाहर निकलने का मौका

KYAKHABARHAI डेस्क · 09 Apr 2026, 03:45 · 2 घंटे पहले ·
NSA अजित डोभाल और बांग्लादेश विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की नई दिल्ली में अहम बैठक हुई। यह बैठक बांग्लादेश के लिए चीन की कर्ज जाल से बाहर निकलने का सुनहरा मौका है।
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बांग्लादेश-भारत संबंधों में नई शुरुआत और चीन के बढ़ते प्रभाव पर अंकुश की संभावना
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8 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक फरवरी 2026 में तारिक रहमान सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में पहली बड़ी राजनयिक पहल है।

इस बैठक में सीमा सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन इस बैठक का असली महत्व इससे कहीं ज्यादा गहरा है — यह बांग्लादेश को चीन के खतरनाक जाल से बाहर निकलने का मौका देती है।

चीन का कर्ज जाल: एक असली खतरा

पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश पर चीन का कर्ज 7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो तीन साल में लगभग दोगुना हो गया। पूर्व अंतरिम सरकार ने चीन से 5 अरब डॉलर का अतिरिक्त कर्ज लेने की तैयारी भी की थी, जिससे कुल कर्ज 12 अरब डॉलर हो जाता। श्रीलंका का हश्र दुनिया ने देखा है — चीन के कर्ज ने उसकी अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया और हंबनटोटा बंदरगाह 99 साल की लीज पर चीन को सौंपना पड़ा।

बांग्लादेश के लिए खतरा और भी बड़ा है। चीन और पाकिस्तान ने मिलकर बनाए JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों की बिक्री की बातचीत चल रही है। अगर बांग्लादेश ये विमान खरीदता है, तो वह दशकों तक चीन के रक्षा उद्योग पर निर्भर हो जाएगा — स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव, अपग्रेड, सब कुछ बीजिंग के हाथ में।

चीन के हाथों में खेलना हमेशा से खतरनाक रहा है

चीन की "Belt and Road Initiative" का इतिहास बताता है कि यह मदद नहीं, जाल है। लाओस रेलवे से लेकर केन्या के मोम्बासा पोर्ट तक, जिस भी देश ने चीन पर भरोसा किया, उसने अपनी संप्रभुता का एक हिस्सा खोया। चीन पहले सस्ते कर्ज देता है, फिर जब देश चुका नहीं पाता, तो रणनीतिक संपत्तियां हड़प लेता है।

बांग्लादेश को भारत-चीन प्रतिद्वंद्विता का अखाड़ा बनाना चीन की रणनीति का हिस्सा है। बंगाल की खाड़ी में नौसैनिक उपस्थिति बढ़ाना, बांग्लादेश में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर कब्जा करना — यह सब चीन की "स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स" रणनीति है जो भारत को चारों तरफ से घेरने के लिए बनाई गई है।

भारत का दरवाजा हमेशा खुला है

डोभाल की यह बैठक एक स्पष्ट संदेश है — भारत बांग्लादेश का पड़ोसी भी है और भरोसेमंद साथी भी। भारत कर्ज के जाल में नहीं फंसाता, बल्कि बराबरी के रिश्ते चाहता है। नई BNP सरकार के लिए यह सही समय है कि वह चीन की चमकदार लेकिन जहरीली पेशकशों से दूर रहे और भारत के साथ पारदर्शी, सम्मानजनक संबंध बनाए। इतिहास गवाह है — जिसने चीन के हाथों में खेला, उसने अपना भविष्य गिरवी रखा।

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