अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर की घोषणा के बावजूद होर्मुज़ जलडमरूमध्य से शिपिंग ट्रैफ़िक लगभग ठप है। बुधवार को सिर्फ़ 5 जहाज़ और गुरुवार को 6 जहाज़ ही जलडमरूमध्य से गुज़र पाए जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या सैकड़ों में होती है। शिपिंग कंपनियाँ ईरान से स्पष्ट सुरक्षा गारंटी और ट्रांज़िट अनुमति का इंतज़ार कर रही हैं।
अभी खाड़ी क्षेत्र में 600 से अधिक जहाज़ फँसे हुए हैं जिनमें 325 टैंकर और 230 तेल टैंकर शामिल हैं। दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी Hapag-Lloyd के 6 कंटेनर जहाज़ भी फँसे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर अभी ट्रैफ़िक सामान्य स्तर पर लौट भी आए तो सभी फँसे जहाज़ों को निकालने में 10 दिन से ज़्यादा लगेंगे और शिपिंग को पूरी तरह पटरी पर लाने में 6 महीने तक का समय लग सकता है।
इस संकट का सीधा असर तेल और गैस की क़ीमतों पर पड़ा है। युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका में पेट्रोल की औसत क़ीमत 40 प्रतिशत यानी लगभग 1.18 डॉलर प्रति गैलन बढ़ चुकी है। भारत, चीन और जापान जैसे बड़े तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है। जब तक ईरान शिपिंग कंपनियों को औपचारिक सुरक्षा गारंटी नहीं देता तब तक स्थिति में सुधार की संभावना कम है।