पंजाब की राजनीति इन दिनों दो मोर्चों पर धधक रही है — एक तरफ़ छात्र संगठन की आग, दूसरी तरफ़ गैंगस्टरों के ख़िलाफ़ युद्ध। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक रैली में स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (SOI) को "स्मैक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया" बोल दिया — और जो तूफ़ान आया, उसने चंडीगढ़ हिला दिया। 8 अप्रैल को 500 से अधिक SOI कार्यकर्ता मान के आवास के बाहर जमा हो गए, गिरफ़्तारी दी, और पुलिस से भिड़ गए। SOI अध्यक्ष राणा रणबीर समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। चंडीगढ़ पुलिस ने बैरिकेड लगाए, हाई अलर्ट जारी किया, लेकिन छात्रों का ग़ुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा।
SOI शिरोमणि अकाली दल का छात्र विंग है और मान की टिप्पणी को "झूठी, निराधार, गहरी अपमानजनक और मानहानिकारक" बताया है। उन्होंने CM को लीगल नोटिस भेजा है — सार्वजनिक माफ़ी और टिप्पणी वापस लेने की माँग। हरसिमरत कौर बादल ने तो सीधा कहा — "ये मुख्यमंत्री हैं या गैंगस्टर?" ये सवाल सिर्फ़ राजनीतिक नहीं है, ये पंजाब की उस युवा पीढ़ी की आवाज़ है जो अपने संगठन का अपमान बर्दाश्त करने को तैयार नहीं। AAP सरकार जो "बदलाव" के नाम पर आई थी, उसके मुख्यमंत्री अब ख़ुद विवादों का केंद्र बन रहे हैं।
दूसरी तरफ़, मान सरकार का गैंगस्ट्रां ते वार (गैंगस्टरों पर वार) अभियान अपनी गति से चल रहा है। शुरू हुए इस अभियान में अब तक 19,642 गिरफ़्तारियाँ हो चुकी हैं, 44,787 से अधिक छापे मारे गए, 301 हथियार, 10 ड्रोन, 4,070 मोबाइल फ़ोन और 548 वाहन ज़ब्त किए गए। सिर्फ़ 74वें दिन (4 अप्रैल) को 551 छापे और 245 गिरफ़्तारियाँ हुईं। एक पाकिस्तान से आया ड्रोन 4 किलो हेरोइन के साथ मार गिराया गया। ये नंबर बताते हैं कि पंजाब में अपराध और नशे का नेटवर्क कितना गहरा है। सवाल ये है — क्या मान सरकार एक हाथ से गैंगस्टरों को मार सकती है और दूसरे हाथ से छात्रों को दबा सकती है? पंजाब का जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।