भारतीय लोकतंत्र ने एक बार फिर अपनी ताक़त दिखा दी। असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों में रिकॉर्डतोड़ मतदान हुआ — और ये संख्याएँ बता रही हैं कि जनता कितनी बेचैन है बदलाव के लिए, या शायद मौजूदा सरकारों को बचाने के लिए। असम में 126 सीटों पर 84.42% मतदान हुआ — 2021 के 82.04% से काफ़ी ज़्यादा। सबसे ज़्यादा वोटिंग दलगाँव में हुई — 94.57%! कुल 722 उम्मीदवार मैदान में थे और 2.49 करोड़ मतदाता पात्र थे। BJP के नेतृत्व वाला NDA तीसरी बार सत्ता चाहता है, जबकि कांग्रेस वापसी का दम भर रही है।
केरल में 140 सीटों पर 77.82% वोटिंग हुई — और यहाँ का मुक़ाबला तो सबसे रोमांचक है। पिनराई विजयन के नेतृत्व में LDF इतिहास रचना चाहती है — लगातार तीसरी बार सरकार, जो केरल में कभी नहीं हुआ। UDF वापसी की दावेदार है, और BJP को उम्मीद है कि त्रिशंकु विधानसभा आए तो किंगमेकर बन जाएँ। कुन्नथुनाद में सबसे ज़्यादा 84.09% मतदान रिकॉर्ड किया गया। पुडुचेरी में तो 86% से ज़्यादा वोटिंग हुई — जो किसी भी मानक से शानदार है।
तीनों राज्यों के नतीजे 4 मई 2026 को आएँगे — क्योंकि एग्ज़िट पोल पर तब तक पाबंदी है जब तक तमिलनाडु (23 अप्रैल) और पश्चिम बंगाल (23 और 29 अप्रैल) का मतदान पूरा नहीं हो जाता। ये चुनाव 2024 के आम चुनाव के बाद सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा हैं। पूर्वोत्तर में BJP का दबदबा कायम रहेगा या कांग्रेस की वापसी होगी? केरल इतिहास रचेगा या परंपरा बरकरार रहेगी? 4 मई को जवाब मिलेगा — और वो जवाब 2029 तक की राजनीति की दिशा तय करेगा।