ईरान की नौसेना ने रविवार को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में अपना सबसे बड़ा नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है। इस अभ्यास में 50 से अधिक युद्धपोत, पनडुब्बियाँ और ड्रोन शामिल हैं। ईरानी सेना के अनुसार यह अभ्यास "रक्षात्मक तैयारी" का हिस्सा है और इसका उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते तनाव का संकेत है।
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुज़रता है। इस अभ्यास की खबर आते ही अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 3% बढ़कर 89 डॉलर प्रति बैरल हो गईं। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि भारत अपनी ज़रूरत का 85% तेल आयात करता है।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस अभ्यास पर "गहरी निगरानी" रखने की बात कही है। मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसेना का पाँचवाँ बेड़ा पहले से तैनात है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर तनाव बढ़ता है तो भारत में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। सरकार ने स्थिति पर नज़र रखने के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई है।