पंजाब के प्रमुख किसान संगठनों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की क़ानूनी गारंटी की माँग को लेकर दिल्ली की ओर मार्च शुरू कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेतृत्व में हज़ारों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में शंभू बॉर्डर से दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। किसानों की माँग है कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करे और उत्पादन लागत पर 50% लाभ सुनिश्चित करने वाला MSP क़ानून बनाए।
हरियाणा सरकार ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात किया है और कंक्रीट बैरियर लगाए हैं। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि "यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार MSP गारंटी क़ानून नहीं बनाती।" पंजाब के मुख्यमंत्री ने किसानों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार से बातचीत की अपील की है।
इस आंदोलन का असर पंजाब की गेहूँ की फ़सल की कटाई पर पड़ सकता है क्योंकि अप्रैल गेहूँ ख़रीद का प्रमुख महीना है। मंडियों में गेहूँ की आवक कम होने से आटे की कीमतें बढ़ सकती हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा है कि सरकार किसानों से बातचीत के लिए तैयार है लेकिन MSP को क़ानूनी अधिकार बनाना "व्यावहारिक रूप से कठिन" है।