भारत की धड़कन
गुरुवार · 23 अप्रैल 2026 · IST
ब्रेकिंग
भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा दिन — तमिलनाडु में 84%, बंगाल के पहले चरण में 78% मतदान, आज़ादी के बाद सबसे ऊंचा आंकड़ाईरान का बड़ा दाँव — ट्रम्प ने सीज़फ़ायर बढ़ाया, घंटों बाद होर्मुज़ में दो कार्गो जहाज़ क़ब्ज़े में, एक पर ग्रेनेड हमलाआईपीएल 2026 का सबसे ज़बरदस्त मोड़ — राजस्थान ने 159 डिफेंड किया, पंजाब किंग्स अजेय, और आज मुंबई-चेन्नई "करो या मरो" के मुहाने परभारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा दिन — तमिलनाडु में 84%, बंगाल के पहले चरण में 78% मतदान, आज़ादी के बाद सबसे ऊंचा आंकड़ाईरान का बड़ा दाँव — ट्रम्प ने सीज़फ़ायर बढ़ाया, घंटों बाद होर्मुज़ में दो कार्गो जहाज़ क़ब्ज़े में, एक पर ग्रेनेड हमलाआईपीएल 2026 का सबसे ज़बरदस्त मोड़ — राजस्थान ने 159 डिफेंड किया, पंजाब किंग्स अजेय, और आज मुंबई-चेन्नई "करो या मरो" के मुहाने पर
राजनीतिखेलटेक्नोलॉजीमनोरंजनव्यापारभारतविश्वविज्ञानस्वास्थ्यशिक्षा
राजनीति 🇮🇳 राष्ट्रीयब्रेकिंग

भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा दिन — तमिलनाडु में 84%, बंगाल के पहले चरण में 78% मतदान, आज़ादी के बाद सबसे ऊंचा आंकड़ा

KYAKHABARHAI डेस्क · 23 Apr 2026, 17:05 · 2 घंटे पहले ·
दो सबसे बड़े राज्य एक ही दिन वोट करने उतरे — और दोनों ने अपने ही रिकॉर्ड तोड़ दिए। छह करोड़ से ज़्यादा वोटर, 386 सीटें, और एक चुनाव आयोग की पुष्टि — यह आज़ादी के बाद सबसे ज़्यादा मतदान वाला राज्यव्यापी चुनाव है।
⚡ आप पर असर
4 मई को नतीजे आएंगे। तब तक हर एग्ज़िट पोल का आंकड़ा शोर है। असली बात यह है कि भारत का वोटर थका नहीं है — उसने देश के इतिहास का सबसे भागीदारी वाला चुनाव दे दिया है।
यह लेख अन्य भाषाओं में पढ़ें

यह सिर्फ़ एक चुनाव नहीं था — यह भारत के लोकतंत्र की ताक़त का प्रदर्शन था। तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर मतदान 84.41% पर बंद हुआ — राज्य के इतिहास का सबसे ऊंचा आंकड़ा, पिछले चुनाव से ग्यारह प्रतिशत अंक ऊपर। करूर ज़िला अकेले 89% पार कर गया। उधर पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 152 सीटों पर लगभग 78.77% वोट पड़े — यह भी एक रिकॉर्ड। चुनाव आयोग ने दोनों आंकड़ों की पुष्टि की है, और दोनों ही अपने-अपने राज्यों में आज़ादी के बाद के सबसे बड़े आंकड़े हैं। छह करोड़ से ज़्यादा लोगों ने एक ही दिन में अपने वोट का अधिकार इस्तेमाल किया।

तमिलनाडु में पहली बार एक पीढ़ी बाद तिकोना मुक़ाबला है। एक तरफ़ एम.के. स्टालिन की डीएमके गठबंधन, दूसरी तरफ़ एडपाडी पलानीस्वामी की अगुआई में एआईएडीएमके-एनडीए, और तीसरा कोण — अभिनेता विजय की टीवीके की ऐतिहासिक शुरुआत। परंपरागत रूप से ऊंचा मतदान सत्तारूढ़ दल के पक्ष में जाता रहा है, लेकिन विजय की रैलियों से निकले युवा वोटर उस गणित को पलट सकते हैं। बंगाल का सवाल अलग है — क्या ममता बनर्जी की टीएमसी ग्रामीण बेल्ट थाम पाई, या बीजेपी ने उन ज़िलों में सेंध लगाई जहां पोलिंग-दिन हिंसा की ख़बरें आईं?

मतगणना 4 मई को है। उसके बीच बाक़ी बंगाल चरणों के दौरान एग्ज़िट पोल पर रोक रहेगी — यानी जो भी आंकड़े मीडिया पर घूम रहे हैं वे सिर्फ़ शोर हैं। लेकिन एक बात शोर नहीं है — जिस भारतीय वोटर को दस साल से कहा जा रहा था कि लोकतंत्र थक गया है, उसी ने देश के इतिहास का सबसे भागीदारी वाला राज्य चुनाव दे दिया। जो जीते सो जीते, यह तथ्य पहले ही हर नतीजे से बड़ा है।

शेयर करें 𝕏 Facebook WhatsApp लिंक कॉपी
और खबरें
राजनीति
मोदी भाषण पर सुप्रीम कोर्ट पहुँची कांग्रेस — दूरदर्शन पर आचार संह
राजनीति
राघव चड्ढा को केंद्र की Z सुरक्षा — AAP पंजाब सरकार का डरा हुआ चे
राजनीति
मोदी सरकार का ऐतिहासिक दाँव — परिसीमन विधेयक के ख़िलाफ़ विपक्ष के
राजनीति
नोएडा हिंसा पर विपक्ष का "आँसू नाटक" — राहुल का भावुक ट्वीट, अखिल
राजनीति
बिहार में इतिहास बदला — नीतीश युग समाप्त, सम्राट चौधरी बनेंगे भाज
राजनीति
योगी सरकार का दमदार फ़ैसला — नोएडा विरोध के 24 घंटे में 21% वेतन