सीज़फ़ायर की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि ईरान की गनबोट्स हरकत में आ गईं। ग्रीक स्वामित्व वाला कार्गो जहाज़ एपामिनोंडास ओमान के तट पर रॉकेट-ग्रेनेड की चपेट में आया — ब्रिज चूर-चूर, चालक दल हिला हुआ। उसी दौरान दूसरा जहाज़ एमएससी फ़्रांसेस्का ईरानी तट के पास रोका गया और उसका हल क्षतिग्रस्त हुआ। तीसरा जहाज़ यूफ़ोरिया थोड़ी देर के लिए ईरानी तट पर अटक गया, बाद में छोड़ा गया। तीनों में से दो को आईआरजीसी ने औपचारिक रूप से ज़ब्त कर लिया। तेहरान कह रहा है "ये जहाज़ बिना परमिट के थे।" वॉशिंगटन कह रहा है "सीज़फ़ायर अनिश्चितकालीन है।" दोनों बातें एक साथ सच नहीं हो सकतीं।
ट्रम्प ने इससे पहले कहा था कि ईरान युद्ध की कोई "समय सीमा" नहीं है, और मध्यावधि चुनावों का दबाव उन पर नहीं है। पाकिस्तान की गुज़ारिश पर सीज़फ़ायर बढ़ाया गया — ताकि ईरान की सरकार युद्ध ख़त्म करने का "एकीकृत प्रस्ताव" दे। ईरान ने जवाब गोलियों से दिया। अमेरिकी नौसेना का होर्मुज़ पर नाकाबंदी कहीं नहीं हटी। जलडमरूमध्य पर काग़ज़ी युद्धविराम है, पानी पर जीता-जागता गोलीबारी।
भारत के लिए यह सिर्फ़ एक दूर का संघर्ष नहीं है। होर्मुज़ से दुनिया का लगभग एक चौथाई समुद्री तेल व्यापार गुज़रता है, और भारत के पेट्रोलियम आयात का बड़ा हिस्सा इसी चोक पॉइंट से होकर आता है। ब्रेंट क्रूड तुरंत उछला, जहाज़ों के बीमा प्रीमियम बढ़े, और ग्रीस के प्रधानमंत्री ने ईरान के बर्ताव को "अस्वीकार्य" कहा। एक ईरानी सैन्य सलाहकार ने सरकारी टीवी पर साफ़ कहा — "अगर नाकाबंदी जारी है, तो सीज़फ़ायर का कोई मतलब नहीं।" यह इस हफ़्ते की सबसे साफ़ बात है, और वॉशिंगटन इसे अनसुना करने की कोशिश में है।